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बाबू राव बनकर Sunil Grover ने उड़ा दिए Paresh Rawal के होश ! || The Kapil Sharma Show ||

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1위@MallikarjunaMalli-k8y3 days ago

Sunil Grover number 1번역 보기

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2위@sanmatikumarjain31933 days ago

यह अन्ना और सोनम समझते क्यों नहीं । ठीक है नेपाल लंका और बंगला देश में लड़कों के भड़कने से सरकारे बदल गयी। लें सरकार नौजवानों की तो नहीं बनी। इमरजेंसी के बाद बदली हुई सरकार में भी वही पुराने नेता फिर से सत्ता में थे। मोरारजी, देवगोडा, चन्द्रशेखर, वीपी सिंह वहीं पुराने नेता। नौजवानों को क्या मिला। आज फिर कोई उन्हें कह रहा है कि बाहर निकल। यह भारतवर्ष की जनता है। इस देश ने भारत देश के दो टुकड़े करवाने वाली कांग्रेस और नेहरू को भी कथित आजादी के बाद पहले आम चुनाव में हरा कर सरकार नहीं बदली। किस प्रकार से करोड़ों लोगों को जन, धन , जर, ज़मीन , जोरू, इज्जत और स्वाभिमान की अपूरणीय क्षति उठानी पड़ी। तब भी न तो इस्तीफा मांगा गया और न ही दिया गया। चुनाव भी कांग्रेस ने ही जीत लिया। महात्मा गांधी, ललित नारायण मिश्र, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्याओं पर किस किस ने इस्तीफा मांगा और किस किस ने इस्तीफा दिया। सबसे बड़े सत्याग्रही मोहनदास गांधी, और संविधान बनाने वाले नेहरू, अम्बेडकर और संविधान सभा ने संविधान बनाते समय सत्याग्रह, आमरण अनशन, भूख हड़ताल जैसी पवित्र व्यवस्थाएं संविधान में क्यों नहीं डाली। बाद में भी सर्वोच्च न्यायालय ने अपने किसी फैसले में कानूनी व्याख्या करते हुए इस विषय को कानूनी जामा नहीं पहनाया। अगर भूख हड़ताल अच्छा कर्म है तो सारे के सारे वर्तमान सरकार विरोधी एक साथ भूख हड़ताल पर बैठ कर क्यों नहीं जनता का भला करते। उन्हें अन्ना हजारे या सोनम वांगचुक का बलिदान ही क्यों चाहिए। पहले भी अन्ना से भूख हड़ताल करा कर केजरीवाल ने सत्ता सुख भोगा और जो उसके कहे अनुसार नहीं चले उन्हें सत्ता सुख नहीं भोगने दिया गया। अब वांगचुक के कन्धे पर बैठ कर कौन-कौन सत्ता सुख पाना चाहते हैं।번역 보기

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3위@ethicsoftechnology7445 days ago

Ye sab ai ka kamal hai번역 보기

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